My Self Dr Vishnu Swaroop 'chandravanshi' PhD Computer Science Belonging from Gorakhpur resides at Lucknow Social Activist as Writer, Critic and Blogger
गुरुवार, 18 जून 2026
आधुनिकता में बदलता समाज
आधुनिकता में बदलता समाज
मनुष्य ईश्वर के दी हुई एक ऐसी प्राणी है, जो आज के आधुनिक युग में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस कहे जाने इस आधुनिक तकनीकि को इंसान के अंदर स्वत ईश्वर ने प्रदान कर रखी है। जो इस आधुनिक युग में तकनीकि रूप से एक प्रणाली बन गई और आज हर तरफ AI की उपयोग और चर्चा की जा रही है। पृथ्वी पर जीव की रचना के साथ समय अनुसार मनुष्य के ही प्रयास से इस आधुनिक युग का निर्माण हो रहा है।
यही कारण है कि समय, काल और परिस्थिति ही सबसे बड़ी मनुष्य या समाज की स्थितियों और परिवर्तन के साथ विकास के रास्ते बनते है। जैसे जैसे मनुष्य की आवश्यकताएं बढ़ती गई, मनुष्य द्वारा स्वयं सहित समाज के विकास के लिए नए नए संसाधनों और चीजों का निर्माण और संचालन करता गया है।
यह केवल आज की बात नहीं है जहां समाज एक नई ऊँचाई और विकास के पथ पर अग्रसर है। पृथ्वी पर जीवों के निर्माण से मनुष्य ने अपने और समाज की आवश्यकता अनुसार आविष्कार और निर्माण करता रहा है। सतयुग, द्वापद और त्रेता से लेकर कॉलेज के पाषाण काल की बात करे तो मनुष्य ने ही हर असंभव लगने वाले कार्यों को संपादित किया। जिसमें सतयुग के असंभव लगाने वाले कार्य जैसे मनुष्य के देवी देवताओं और राक्षसी प्रभाव के लोगों ने भी एक से एक तकनीकी का विकास किया जिसने आज के टेस्टूब बेबी हो या किसी को जीवित करने की शक्ति या अंग प्रत्यारोपण जैसे घटनाएं कथानक के रूप में उपलब्ध है। त्रेता युग में ईश्वर के मनुष्य के रूप में राम के कथानक या राक्षसी प्रवृति के रूप में रामन का भी कार्य किसी आधुनिक तकनीकी से कम नहीं। इसी प्रकार द्वापद में ईश्वर के रूप में कृष्ण का भी कार्य किसी आधुनिक तकनीकि से कम नहीं था।
आज हम कलयुग में है जैसी की मान्यताएं कहते है। युग के रूपांतरण की भी घटनाएं किसी आधुनिकता से कम नहीं है।
इसी काल में पाषाण काल की भी घटनाएं और समय काल ने इंसान को उस समय के अनुसार अपने और समाज के लिए भी आधुनिक तकनीकि का कार्य किया जिसने चूंकि मनुष्य की जनसंख्या सीमित रही होगी और आवश्यकताएं भी समिति थे तो लोगों को जिसकी आवश्यकता रही उसका निर्माण और विकास किया। जिसमे लोगों द्वारा कबीले का निर्माण कर आज के राजा का राज्य, या फिर बदले परिवेश में प्रदेश या देश के निर्माण की संज्ञा दी जा सकती है।
आज भी आदिवासी क्षेत्रों में बहुत से कबीले के ग्रुपों को देखा जा सकता है।
अब जैसे जैसे मनुष्यों द्वारा समय, काल और परिस्थितियों को पाया मनुष्यों ने विकास के निर्माण के साथ जनसंख्या का विकास बहुत तेज़ी से किया, जिसका कारण मुख्यतः पृथ्वी पर उपलब्ध अपार संसाधनों का उपयोग करते हुए अपने जनसंख्या को नियंत्रित किया जाय या नहीं इस पर कभी विचार किया ही नहीं। जिससे धीरे धीरे समाज का विस्तार भी तेजी से होता रहा। इसी कड़ी में पहले संसाधनों राजा का राज्यों का गठन और विस्तार होता गया। फिर एक समय ऐसा भी आया कि पूरे विश्व में संसाधनों के दोहन और अपने बढ़ते आवश्यकता के लिए पूरे विश्व में अपने अपने राज्य को बढ़ाने और विस्तार करने की जरूरत पड़ने लगी। यह गति विधि पूरे संसार में घटित होती है। हम यदि अपने सनातन धर्म की बात इस युग के लिए करते है तो यह सच्चाई है कि एक समय में सनातन धर्म के स्थापना और विस्तार विश्व में सबसे बड़े धर्म और रूप में था। जैसा कि धार्मिक पुराणों और धार्मिक ग्रंथो में वर्णित है।
हम पुनः आज के आधुनिक युग के तरफ यदि आते हैं तो पाते है सनातन धर्म के अनुयाई मुख्यत एशिया क्षेत्र और बाद में भारत
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